ऐसे कर्मवीर को हीं सफ़लता मिलता है ...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
पथ के पथिक लक्ष्य की तलाश में,
कर्मभूमि पर सफ़लता की प्यास में,
जीवनपथ के कठिन राह पर निरंतर चलता है,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफलता मिलता है ...
जिद्द के जुनून, संघर्ष की आग में,
हालात के विघ्न, प्रतिस्पर्द्धा के संसार में,
हर पल तूफ़ान में दीपक की तरह जलता है,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ...
चुनौतियों के समंदर, बाधाओं की रार में,
असफ़लता के भी भयावह घनघोर अंधकार में,
अपने पथ से तनिक नहीं टलता है ,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ...
कर्तव्यों के बोझ, षड्यंत्र के व्यापार में,
कलुषित राजनीती व भ्रष्टाचार के बाज़ार में,
अपने ईश्वर पर अडिग भरोसा करता है,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ...
सूर्य की तपिश, आमवश्या की अँधेरी रात में,
ज्वालामुखी के विध्वंस, सुनामी के हाहाकार में,
अपने आत्मबल को फ़िर भी स्थिर रखता है,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफलता मिलता है ...
दुर्जन की दुष्टता, सज्जन के प्रभाव में,
सहयोग और साधन के बिल्कुल अभाव में,
जुगनू की तरह अँधेरे से निरंतर लड़ता है,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ...
धरातल की गहराई, ऊंची आकाश में,
असफ़लता के बवंडर, सफ़लता के प्रकाश में,
अपने चरित्र को बिल्कुल नहीं बदलता है,
ऐसे हीं कर्मवीर को सफ़लता मिलता है ...
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