तेरे दिये ग़म छिपा कर मुझे सारी उम्र बिताना है ...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
किसी के आंखो का तारा हूँ,
किसी को रब से ज्यादा प्यारा हूँ,
अक्सर उन हसीन यादों में खोया रहता हूँ,
मेरी जां, जो तेरे संग गुजारा हूँ ...
इन वादियों में हसीनो की कोई कमी नहीं,
ऐसा नहीं कि तुझ सा हंसी यहाँ कोई नहीं,
फ़िर भी मैं तेरी मासूमियत का मारा हूँ..
तेरे प्यार में बन बैठा आशिक़ आवारा हूँ ...
मेरी गुस्ताखी का यूं मुझे सजा न दे,
मेरी वफ़ा का ऐसा शीला ना दे,
तन्हाई के इन पलों को बड़ी मुश्किल से गुजारा हूँ,
जमाने के सितम नहीं तेरी खामोशी का मारा हूँ ...
अपने लबों से प्यार के दो बोल सुना,
अगर तूं नाराज है, अपनी शिकवा को कर बयां,
सांसे हलक में फंसी है, फ़िर भी तेरे पास आया हूँ,
कोई जबरदस्ती नहीं, तेरी मर्जी से तुम्हें अपना बनाया हूँ ...
अगर वफ़ा तेरी फ़ितरत नहीं है,
याद रख प्यार तेरे क़िस्मत में नहीं है,
तुमसे बिछड़ कर भी तुम्हें भूला नहीं पाया हूँ,
दिल की गहराई में ताज से सुंदर आशियां बनाया हूँ ...
नजरें चुरा कर गुनाहों को मत छिपा,
मेरी ग़लती क्या है, इन वादियों को तूं बता,
तेरी मोहब्बत में मैं रब को भी भुलाया हूँ,
तेरी बेवफाई का शीला है, अपने दिल को जख्मों से सजाया हूँ ...
ख़ुश रहना तुम अपनी ख्वाईशौं की महफ़िल में,
निकाल देना मेरी मोहब्बत अपने तंगदिल से,
तेरी बेवफाई को मुझे दुनियाँ से छिपाना है,
तेरे दिये ग़म छिपा कर मुझे सारी उम्र बिताना है ...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें