©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
23. हवा हो अगर तेज तो अक्सर घर का चिराग बुझ जाता है,
अगर लगी हो आशियाने में आग, फिर क्यों बहक जाता है
अगर अंधेरे में रौशनी करना इतना ही बड़ा गुनाह है
घर में आग लगाने में हवा को इतना मजा क्यों आता है
©® विपिन वियान हिंदुस्ता
24. जाहिलों की बस्ती में बाबा ज्ञानी बन कर आए थे
उनसा कोई ज्ञानी नहीं, अभिमानी बन कर आए थे
लोगों को मोह माया त्यागने का खूब ज्ञान दिया था
जो खुद माता लक्ष्मी की मोटी मेहरबानी से आए थे
©® विपिन वियान हिंदुस्ता
25. उन्हें लगता है हम उनकी चालाकियों से बेखबर हैं
हमारी नज़रों के साए में सांस लेते जो हर पहर हैं
गांव के सादगी का सुकून उन नामुरादों को क्या प
साजिश की बुनियाद पर खड़ा जिनका शहर है
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी,
26. गमों के शहर में खुशी का टापू ढूंढता हूं,
बड़ी शराफत से लूटा, डाकू वह ढूंढता हूं,
कत्ल की साजिश रचने वाले गैर नहीं थे,
खुद के लिए चढ़ाया था धार, वह चाकू ढूंढता हूं
27. मुझे मायूस देख कुछ लोग काफी खुशियां मना रहा थे,
यह देख मैं मुस्कुराया,फिर ना जाने क्यों तिलमिला रहे थे,
हमारा ऊपर वाले से कनेक्शन कुछ ज्यादा ही अजीब है,
हमसे जलने वाले, हमें ही किस्मत का मारा बतला रहे थे,
28. ख्वाइश की बुलबुले पर सवार यह जिंदगी,
हर पल, हर कदम हमें बेइंतहां बेकरार करती है,
संतोष के समंदर में डूबकर भी अगर तैरना नहीं छोड़े,
जिंदगी के हर मोड़ पर खुशियां हमारा इंतजार करती है...
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
29. उन्हें पूरा भरोसा था कि एक दिन यह वक्त बदल जायेगा,
यह भी भरोसा था कि वक्त बदलते ही कमबख्त बदल जायेगा,
अब उसे कैसे बताएं कि मुझे खुद से ज्यादा तेरे भरोसे पर भरोसा था,
मुझे भय था कि अगर तेरी सीरत नहीं बदली तो एक दिन सोहबत बदल जायेगा...
30. किसी को अपने बाप की दौलत पर गरुर था,
किसी को अपनी काबिलियत का सरूर था,
मुझे तो सिर्फ कलम के उस हुनर की तलाश थी,
आवाज उठाऊं उसका जो वर्षों से मजबूर था,
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
31.अग्निपरीक्षा
राज्याभिषेक छोड़कर उसने वनवास स्वीकार किया,
आज भी वह पूजे जाते हैं, जिसने यह चमत्कार किया,
बड़ी खामोशी से एक राजकुमारी अग्निपरीक्षा देती रही,
सामाज के टपोरियों से आहत पति, बिन बात तिरस्कार किया
*©® विपिन वियान हिंदुस्तानी*
32. मंजिल की तलाश में, मैं रास्ता भूल गया,
जाना था जिस ओर, उसके प्रतिकूल गया,
यह तेरी दुआओं का भी क्या खूब असर है,
जहां डूबना था मेरी नियति, वहां भी संभल गया...
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
33. लोग कहते हैं इश्क में हम बेइंतहा तबाह हो गए,
हमारी बदकिस्मती देखिए, क्या से क्या हो गए,
अपनी नाकामी छिपाने का हुनर यह लाजवाब है,
वर्ना इस लत में कई फकीर अमर बादशाह हो गए,
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
34. कौन कहता है कि खुश रहने के लिए ब्रांडेड कपड़े की जरूरत है,
फकीर को खुश होते देख विश्वास हो गया आज भी रब की हुकूमत है,
35. आदमी का एक दिन वक्त बदलता है,
नियति, नीयत और संगत बदलता है,
इंसानी भूख के रूप यहां अनेकानेक हैं,
क्षुधानिवृत्ति की आग सबकुछ बदलता है,
36. संघर्ष से मिली आजादी लेकिन हमें नोट का गांधी भी पसंद है,
हम हैं इतने शरीफ, सोना अगर न मिले तो चांदी भी पसंद है,
सिद्धांत और विचारधारा की बात भी हम सुकून में कर लेते हैं,
सत्ता की मलाई चाटने को मिले तो नेता खानदानी भी पसंद है
36. जिंदगी ने जज्बातों से कुछ इस कदर खेला है,
भीड़ से दूरी बनाने लगा और लोग कहने लगे अकेला है,
37. लोग आजकल कहने लगे हैं कि तुम्हारे शब्द चोट बहुत पहुंचाते हैं,
मैंने भी कहा आप अंदर से कुछ और हैं, बाहर कुछ और क्यों दिखाते हैं ??
38. सब जानते हैं कि देश के हालात बुरे हैं,
सपना जिनको पुरा हो जाना था, अधूरे हैं,
देश पर मर मिटने वाले लोग भी यहां हुए,
दारू मुर्गा पर वोट बेचने वाले भी कई सिरफिरे हैं...
39. खुद ही मिटाकर पेड़ों को फिर हम छांव ढूंढते हैं,
बांध कर धारा को फिर खुद के लिए नाव ढूंढते हैं,
इन कारस्तानियों का कहर हर जगह गूंज रहा है,
जो नेमतें थी सर्वसुलभ, उसे कहां कहां ढूंढते हैं...
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
40. शतरंज के खेल में *कमजोर खिलाड़ी* को अपने वजीर पर बहुत गरूर होता है, और *मजबूत खिलाड़ी* को पता होता है कि प्यादे को वजीर कैसे बनाना है।
41. उन्हें शौक है हर बाजी को वजीर से जितने का,
हमें शौक है फकीरी में भी वजीर दिखने का,
नकल वकल करने का हमारे पास अक्ल नहीं है,
सब्र रखो, देखना खेल, प्यादे के वजीर बनने का
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
42. धन का गुमान है और बेशर्मी से धन के लिए ही मरते हो,
ऐसी ऊंचाई का क्या फायदा, जब उसी के लिए गिरते हो,
अगर चाहें तो तुम्हारी तरह गिरकर हम भी धनवान हो सकते हैं,
मगर तुम्हारी तरह बेशर्म होने का शोक नहीं, फिर क्यों डरते हो,
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
43. हमें पता था हमारी मंजिल कहीं और है,
फिर भी ना जाने क्यों इस ओर चलते रहे,
हमें पता था कि जल्लादों की यह बस्ती है,
आंसुओं को छिपा कर खुद को छलते रहे,
44. जल्लादों की बस्ती में हम आंसू छिपाए घूम रहे थे,
रहना था कोसों दूर, उन्हीं के तलवों को चूम रहे थे,
आदमखोर भेरियों से बहुत आस लगाए हम बैठे थे,
दर्द भरी करुण आवाज बड़े शौक से वह सुन रहे थे
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
45. कसाइयों ने एक बेहद ही खास नियम बनाया है,
जिने से ज्यादा मरने का पागलों को फायदा बताया है,
मूर्खों की फौज मरने मारने को भी उतारू हो गए हैं,
कुकर्मियों को भ्रम है, खुदा ने इनके लिए खास जन्नत बनाया है,
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
46. शहरों में यह रिवाज बड़ा खास हो गया है,
पालतू कुत्तों का दिलों में वास हो गया है,
बूढ़े मां बाप वृद्धाश्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं,
निर्लज्ज पीढ़ी का शानदार विकास हो गया है,
*©® विपिन वियान हिंदुस्तानी*
47. हर घड़ी वह न जाने क्यों जख्म देने को तैयार था,
मैं बेशर्म समझता रहा, उसे लगता मैं लाचार था,
जब स्वार्थवश भले भी भला बताने लगे तो मैंने कहा
सिर्फ हरकतें कुत्तों जैसी है, हां आदमी शानदार था,
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
48. वाहियात लोगों की एक बात बड़ी ही खास होती है,
खुद के फायदे की बात हो तो जुबां पर मिठास होती है,
मौकापरस्ती में माहिर ये लोग गधे को भी बाप बना लेते हैं,
धूर्त करवाता सत्यानाश बच गए तो जिंदगी अत्रास होती है,
©® विपिन वियान हिंदुस्तानी
49. आस्था के नाम पर हो रही गलतियां अंधविश्वास है,
कई बार इन गलतियों के कारण होता सत्यानाश है,
समझ कर भी लोग कई बार इसे समझने नहीं देते हैं,
स्वार्थी पतितों का इसके पीछे स्वार्थ बड़ा ही खास है
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें