सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शायरी

1. भंवर में फंसकर भी अक्सर निकलता रहा हूं,
जहां पकड़ होती है मजबूत, फिसलता रहा हूं,
जलने वालों के दुआओं का क्या खूब असर है,
घने अंधेरे के बीच दीपक की तरह जलता रहा हूं

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

2. मुझे अपनी पत्नी पर बहुत फख्र था
कि जान से ज्यादा मुझे चाहती है वो,
खाना खा कर हाथ पर्दे से पोछ लिया,
मत पूछिए गुस्से में क्या क्या सुनाती है वो,

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

3. उनके ख्यालों में डूबते ही, जिंदगी शाहबाज हो जाता है,
पता ही नहीं चलता कब दिन और कब रात हो जाता है,
खुदा की मेहरबानियों की फेहरिस्त बेशक बहुत लंबी है,
तेरे उदास चेहरे का ख्याल और मेरा दिल उदास हो जाता है,

4. हम वफा करके भी बेवफ़ा हो गए,
कोई दगा करके भी बावफा हो गए,
उनकी किस्मत वो तो सजदा हो गए,
हम किसे बताएं, क्या से क्या हो गए

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

5. सभी को शिकायत है कि जनाब बदमिजाज है,
अब किस किस को बताएं, वजह क्या खास है,
हर बात मुस्कुरा कर करने वालों से रहिए सचेत,
इस अदा के घायल हर महफिल में कई कद्रदान है

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

6. कारवां साथ लेकर चलने की ख्वाइश थी, इसलिए थोड़ा पीछे रह गया,
अगर कोई फिसले तो सहारा दे सकूं, इसलिए थोड़ा नीचे रह गया,
ऊपर की हरियाली को देख आंख चौंधियाना कोई नई बात नहीं है,
इन मूर्खों के होशियारी का वहम देख,
मैं तो आंख मीचे रह गया,

7. सभी की शिकायत रही, पैसे नहीं कमाता है,
इतना किया खर्च, कुछ नहीं हुआ फायदा है,
सबकी जरूरतें पूरी करने में इतना मगरुर हुआ,
खुशी हो गई गुम, पैसों से नफरत हुआ जाता है

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

8. अगर अपना माना है तो गैरों सा सलूक क्यों है,
अगर गैर हैं तो फिर हम दोनों में ताल्लुक क्यों है,
साथ चलना आसान नहीं, शायद फांसले बहुत है,
अगर यही मुनासिब है तो फिर तक्कलूफ क्यों है ...

 ©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

9. देने वाले ने हर बार उम्मीद से ज्यादा दिया,
मुश्किल चुनौतियों से टकराने का इरादा दिया,
ठोकर खाने से इंसान कब कमजोर हुआ है,
अनमोल है वह शख्स, बुरे दौर में जिसने सहारा दिया

10. यह वक्त का दरिया है जनाब,
तैरोगे नहीं तो डूब ही जाओगे,
बड़ी ख्वाइश से कुछ नहीं होता,
कर्म बड़ा हो तभी मंजिल पाओगे,

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

11. हर कठिन सवाल का उसके पास एक बेहतरीन जवाब था,
विश्वास नहीं होता हकीकत था या एक सुनहरा ख्वाब था,

12. जब दिल को लगा चोट, दिमाग में शोर मचाता है,
आदमी आदमी कम, जानवर ज्यादा बन जाता है,
ऐसे लोगों से जनाब थोड़ा संभल कर रहा कीजिए,
अक्सर ऐसे पागल इतिहास भूगोल बदल जाता है,

*©® विपिन वियान हिंदुस्तानी*

13. उम्र बढ़ता गया और परेशानी भी बढ़ती ही गई,
भीड़ भी बढ़ता गया और तन्हाई भी बढ़ती गई,
जिसे मुझसे ज्यादा मेरी किस्मत पर एतबार था,
बदकिस्मती देखो, जिंदगी से वही दूर चली गई,

14. ये रहती तो वो होता, वो रहती तो ये होता,
न जीता हूं, न मरता, तानों की घूट में हूं तड़पता,
ईश्वर तुम्हें तुम्हारे ख्वाबों की जन्नत अता करे,
अपनी हैसियत में सिमट जीने का, मैं भीख मांगता,

15. मुझे किसने क्या दिया, मुझे क्या मिला,
मैंने क्या पाया, है लाखों शिकवा गिला,
सुकून मिले तो बेशक जवाब खोज लेना,
सिर्फ बख्श दो उसे, किस्मत ने जिसे छला,

16. गनीमत है,वक्त के दिए दर्द का दवा ही अब तक ढूंढ रहा हूं,
जख्म देने की लत लग गई तो दर्द भी दर्द से कराह उठेगा,
मेरी खामोशी का हर वक्त यूं मजाक मत उड़ाया करो,
अगर बेशर्मी पर उतर आया तेरे जैसा बेशर्म भी शरमा जायेगा...

✍🏻 विपिन वियान हिंदुस्तानी

17. लोग कहते हैं, रास्ते कठिन हैं,बताओ भाई आसान कब था,
कदम कदम पर है धोखेबाज, इस बात से अनजान कब था,
आने वाले वक्त के बारे में सोच सोच कर परेशान क्यों होना,
राम सीता ने किया पग पग त्याग, किस्मत मेहरबान कब था ?


18.हम अपना समझ नजरंदाज करते गए,
वह दस्तंदाज़ी में उस्ताद बनते गए,
जिनकी फिक्र में जानबूझकर हारते रहे,
वही षड्यंत्र के बड़े तीरंदाज बनते गए,

@ विपिन वियान हिंदुस्तानी

19. ए खुदा, वक्त मेरा इतना खराब न हो,
कि आंखो में मेरे कोई ख्वाब न हो,
अपनी हैसियत भूल, जमीन पर पैर न टिके,
तेरी मेहरबानी इतनी बेहिसाब न हो...

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

20.मुझे बेशक महफिल की इंतहा ख्वाइश है लेकिन सच बोलूं तो तन्हाई पसंद है,
खुशी में भीड़ इकट्ठा हो ही जायेगी, कोई गम के साथियों को ढूंढ लाओ जो चंद है,

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

21.इगो और एटिट्यूड तो मेरा भी कभी कम नहीं था,
बहुत कुछ हुआ तबाह लेकिन कोई गम नहीं था,
मेरी शिकायत कर कद ऊंचा हो तो बेशक कर लो,
मगर सबको पता है, सुनाने वाला कितना सज्जन था,

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

22.
इगो और एटिट्यूड तो मेरा भी कम नहीं है,
बहुत हुई तबाही लेकिन कोई गम नहीं है,
मेरी शिकायत से कद ऊंचा हो तो बेशक करो,
मगर सबको पता है, तू भी सज्जन नहीं है,

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


23. हवा हो अगर तेज तो अक्सर घर का चिराग बुझ जाता है,

अगर लगी हो आशियाने में आग, फिर क्यों बहक जाता है

अगर अंधेरे में रौशनी करना इतना ही बड़ा गुनाह है

घर में आग लगाने में हवा को इतना मजा क्यों आता है


©® विपिन वियान हिंदुस्ता


24. जाहिलों की बस्ती में बाबा ज्ञानी बन कर आए थे

उनसा कोई ज्ञानी नहीं, अभिमानी बन कर आए थे

लोगों को मोह माया त्यागने का खूब ज्ञान दिया था

जो खुद माता लक्ष्मी की मोटी मेहरबानी से आए थे


©® विपिन वियान हिंदुस्ता


25. उन्हें लगता है हम उनकी चालाकियों से बेखबर हैं

हमारी नज़रों के साए में सांस लेते जो हर पहर हैं

गांव के सादगी का सुकून उन नामुरादों को क्या प

साजिश की बुनियाद पर खड़ा जिनका शहर है


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी,


26. गमों के शहर में खुशी का टापू ढूंढता हूं,

बड़ी शराफत से लूटा, डाकू वह ढूंढता हूं,

कत्ल की साजिश रचने वाले गैर नहीं थे,

खुद के लिए चढ़ाया था धार, वह चाकू ढूंढता हूं


27. मुझे मायूस देख कुछ लोग काफी खुशियां मना रहा थे,

यह देख मैं मुस्कुराया,फिर ना जाने क्यों तिलमिला रहे थे,

हमारा ऊपर वाले से कनेक्शन कुछ ज्यादा ही अजीब है,

हमसे जलने वाले, हमें ही किस्मत का मारा बतला रहे थे,


28. ख्वाइश की बुलबुले पर सवार यह जिंदगी,

हर पल, हर कदम हमें बेइंतहां बेकरार करती है,

संतोष के समंदर में डूबकर भी अगर तैरना नहीं छोड़े,

जिंदगी के हर मोड़ पर खुशियां हमारा इंतजार करती है...


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


29. उन्हें पूरा भरोसा था कि एक दिन यह वक्त बदल जायेगा,

यह भी भरोसा था कि वक्त बदलते ही कमबख्त बदल जायेगा,

अब उसे कैसे बताएं कि मुझे खुद से ज्यादा तेरे भरोसे पर भरोसा था,

मुझे भय था कि अगर तेरी सीरत नहीं बदली तो एक दिन सोहबत बदल जायेगा...


30. किसी को अपने बाप की दौलत पर गरुर था,

किसी को अपनी काबिलियत का सरूर था,

मुझे तो सिर्फ कलम के उस हुनर की तलाश थी,

आवाज उठाऊं उसका जो वर्षों से मजबूर था,


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


31.अग्निपरीक्षा

राज्याभिषेक छोड़कर उसने वनवास स्वीकार किया,

आज भी वह पूजे जाते हैं, जिसने यह चमत्कार किया,

बड़ी खामोशी से एक राजकुमारी अग्निपरीक्षा देती रही,

सामाज के टपोरियों से आहत पति, बिन बात तिरस्कार किया


*©® विपिन वियान हिंदुस्तानी*


32. मंजिल की तलाश में, मैं रास्ता भूल गया,

जाना था जिस ओर, उसके प्रतिकूल गया,

यह तेरी दुआओं का भी क्या खूब असर है,

जहां डूबना था मेरी नियति, वहां भी संभल गया...


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


33. लोग कहते हैं इश्क में हम बेइंतहा तबाह हो गए,

हमारी बदकिस्मती देखिए, क्या से क्या हो गए,

अपनी नाकामी छिपाने का हुनर यह लाजवाब है,

वर्ना इस लत में कई फकीर अमर बादशाह हो गए,


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

34. कौन कहता है कि खुश रहने के लिए ब्रांडेड कपड़े की जरूरत है,

फकीर को खुश होते देख विश्वास हो गया आज भी रब की हुकूमत है,


35. आदमी का एक दिन वक्त बदलता है,

नियति, नीयत और संगत बदलता है,

इंसानी भूख के रूप यहां अनेकानेक हैं,

क्षुधानिवृत्ति की आग सबकुछ बदलता है,



36. संघर्ष से मिली आजादी लेकिन हमें नोट का गांधी भी पसंद है,

हम हैं इतने शरीफ, सोना अगर न मिले तो चांदी भी पसंद है,

सिद्धांत और विचारधारा की बात भी हम सुकून में कर लेते हैं,

सत्ता की मलाई चाटने को मिले तो नेता खानदानी भी पसंद है


36. जिंदगी ने जज्बातों से कुछ इस कदर खेला है,

भीड़ से दूरी बनाने लगा और लोग कहने लगे अकेला है,


37. लोग आजकल कहने लगे हैं कि तुम्हारे शब्द चोट बहुत पहुंचाते हैं,

मैंने भी कहा आप अंदर से कुछ और हैं, बाहर कुछ और क्यों दिखाते हैं ??


38. सब जानते हैं कि देश के हालात बुरे हैं,

सपना जिनको पुरा हो जाना था, अधूरे हैं,

देश पर मर मिटने वाले लोग भी यहां हुए,

दारू मुर्गा पर वोट बेचने वाले भी कई सिरफिरे हैं...


39. खुद ही मिटाकर पेड़ों को फिर हम छांव ढूंढते हैं,

बांध कर धारा को फिर खुद के लिए नाव ढूंढते हैं,

इन कारस्तानियों का कहर हर जगह गूंज रहा है,

जो नेमतें थी सर्वसुलभ, उसे कहां कहां ढूंढते हैं...


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


40. शतरंज के खेल में *कमजोर खिलाड़ी* को अपने वजीर पर बहुत गरूर होता है, और *मजबूत खिलाड़ी* को पता होता है कि प्यादे को वजीर कैसे बनाना है।


41. उन्हें शौक है हर बाजी को वजीर से जितने का,

हमें शौक है फकीरी में भी वजीर दिखने का,

नकल वकल करने का हमारे पास अक्ल नहीं है,

सब्र रखो, देखना खेल, प्यादे के वजीर बनने का


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


42. धन का गुमान है और बेशर्मी से धन के लिए ही मरते हो,

ऐसी ऊंचाई का क्या फायदा, जब उसी के लिए गिरते हो,

अगर चाहें तो तुम्हारी तरह गिरकर हम भी धनवान हो सकते हैं,

मगर तुम्हारी तरह बेशर्म होने का शोक नहीं, फिर क्यों डरते हो,


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


43. हमें पता था हमारी मंजिल कहीं और है,

फिर भी ना जाने क्यों इस ओर चलते रहे,

हमें पता था कि जल्लादों की यह बस्ती है,  

आंसुओं को छिपा कर खुद को छलते रहे,


44. जल्लादों की बस्ती में हम आंसू छिपाए घूम रहे थे,

रहना था कोसों दूर, उन्हीं के तलवों को चूम रहे थे,

आदमखोर भेरियों से बहुत आस लगाए हम बैठे थे,

दर्द भरी करुण आवाज बड़े शौक से वह सुन रहे थे


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


45. कसाइयों ने एक बेहद ही खास नियम बनाया है,

जिने से ज्यादा मरने का पागलों को फायदा बताया है,

मूर्खों की फौज मरने मारने को भी उतारू हो गए हैं,

कुकर्मियों को भ्रम है, खुदा ने इनके लिए खास जन्नत बनाया है,


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


46. शहरों में यह रिवाज बड़ा खास हो गया है,

पालतू कुत्तों का दिलों में वास हो गया है,

बूढ़े मां बाप वृद्धाश्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं,

निर्लज्ज पीढ़ी का शानदार विकास हो गया है,


*©® विपिन वियान हिंदुस्तानी*


47. हर घड़ी वह न जाने क्यों जख्म देने को तैयार था,

मैं बेशर्म समझता रहा, उसे लगता मैं लाचार था,

जब स्वार्थवश भले भी भला बताने लगे तो मैंने कहा

सिर्फ हरकतें कुत्तों जैसी है, हां आदमी शानदार था,


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


48. वाहियात लोगों की एक बात बड़ी ही खास होती है,

खुद के फायदे की बात हो तो जुबां पर मिठास होती है,

मौकापरस्ती में माहिर ये लोग गधे को भी बाप बना लेते हैं,

धूर्त करवाता सत्यानाश बच गए तो जिंदगी अत्रास होती है,


©® विपिन वियान हिंदुस्तानी


49. आस्था के नाम पर हो रही गलतियां अंधविश्वास है,

कई बार इन गलतियों के कारण होता सत्यानाश है,

समझ कर भी लोग कई बार इसे समझने नहीं देते हैं,

स्वार्थी पतितों का इसके पीछे स्वार्थ बड़ा ही खास है








टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

परिवर्तन

परिवर्तन ------------------------------------------------- समृद्धि के पीछे मैं था भागा, रहा फिर भी मैं अभागा, जिंदगी बहुत दूर जा चुकी थी, जब तलक मैं था जागा... जड़ निस्तेज, तेज शाखा, दुनियां हैरत में, इतना तेज भागा, मेरी खुशियां रह गई पीछे, मैं आगा, जब तलक मैं था जागा ... संसाधन कम था, हिम्मत ज्यादा, पग पग पर था अनंत ही बाधा, विजय किया प्राप्त, छूट गया रिश्ता नाता, जब तलक मैं था जागा... पीड़ाएं बहुत थी, फिर भी था राजा, छोटी छोटी बातें करता था साझा, बड़ी बड़ी खुशियों में अब आता नहीं मजा, जब तलक मैं था जागा... ठहाकों की खनक, फिका बाजा, मेरा अतीत मुझे वह दिन लौटा जा, तड़पता रहा बन कर कृष्ण, रोती राधा, जब तलक मैं था जागा... पहले रो कर भी था बात मान जाता, अब हर बात में हूं, अकड़ दिखाता, ताकतवर हुआ नहीं मैं, रूठ गया मेरा विधाता, जब तलक मैं था जागा...

४०. ऐसी ममता को नित्य नमन (निभा पत्रिका) @

ऐसी ममता को नित्य नमन ... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी माँ के ममता की छाँव है अनमोल,  इससे बढ़कर नहीं कोई स्वर्ग और भवन,  तेरे आशीषपूर्ण स्पर्श से हर जाए सारे दुःख,  ऐसी ममता क़ो नित्य नमन .... इनके कठिन संघर्ष का मुश्किल वर्णन,  इनके त्याग का कठिन विवरण,  संतान की ख़ुशी के लिये सर्वस्व त्याग दे,  ऐसी ममता क़ो नित्य नमन ... धड़कन की आवाज भी जिनकी देन है, जिसने इस सुंदर संसार में क्या हमारा सृजन,  जिनके दूध का कर्जदार शरीर का कण-कण, ऐसी ममता को नित्य नमन ... ऊंचाई चाहे जितनी कर ले हम हासिल,  छू ले क्यों ना चाहे हम गगन,  जिनकी गोद में खेला हमारा बचपन,  ऐसी ममता को नित्य नमन ... हमारी छोटी सफलता से पुलकित जिसका मन,  सबसे ज्यादा हमारी सफलता से मनाता हो जश्न,  कर्जदार उसका यह शरीर और यौवन,  ऐसी ममता को नित्य नमन ... इस सृष्टि में अगर हो जाएं हम दफन,  मेरी मौत से पहले, ख़ुद के लिये मांगे कफ़न,  अपने कलेजे के टुकड़े के लिये करे सर्वस्व अर्पण,  ऐसी ममता को नित्य नमन ...

पिता का छत्रछाया

पिता का छाया  (कहानी) ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी एक लड़की के जन्म लेते हीं सबसे ज्यादा ज़िम्मेदारी का भार एक पिता के ऊपर हीं आ जाता है। समय कितना भी बदल गया हो लेकिन एक लड़की की जिंदगी का भविष्य आज भी सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पिता की क्या हैसियत है और उसका पिता अपनी लड़की के सुरक्षित और उज्जवल भविष्य के लिये कितना धन खर्च करने की इच्छा रखता है। सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो उस लड़की का होता है जिसके सिर पर पिता का छत्रछाया हीं नहीं हो। सुगंधा एक पढ़ी लिखी और समझदार लड़की है। भगवान ने भले हीं उसे बहुत सुंदर काया नहीं दिया हो लेकिन थोड़े छोटे कद की वह एक आकर्षक महिला है। दिल उसका बिल्कुल निश्छल और उम्र के हिसाब से थोड़ा बच्चा है। अपने आस-पास के लोगों का ख्याल रखना और दूसरे के गम से तुरंत गमगीन हो जाना उसके स्वभाव की सबसे बड़ी खासियत है। किसी पर भी भरोसा कर लेना और घर आने-जाने वाले लोगों की खातिरदारी में तुरंत तल्लीन हो जाना उसे सभी के बीच लोकप्रिय बनाता है। इन सबके बीच एक कसक जो उसे अंदर हीं अंदर सालती है वह है उसकी अपनों से उन उम्मीदों का पहाड़ जो एक बिना बाप के लड़की की शायद हीं पूरी होती...