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मुक्तक

गनीमत है,वक्त के दिए दर्द का दवा ही अब तक ढूंढ रहा हूं,
जख्म देने की लत लग गई तो दर्द भी दर्द से कराह उठेगा,
मेरी खामोशी का हर वक्त यूं मजाक मत उड़ाया करो,
अगर बेशर्मी पर उतर आया तेरे जैसा बेशर्म भी शरमा जायेगा...

✍🏻 विपिन वियान हिंदुस्तानी


लोग कहते हैं, रास्ते कठिन हैं,बताओ भाई आसान कब था,
कदम कदम पर है धोखेबाज, इस बात से अनजान कब था,
आने वाले वक्त के बारे में सोच सोच कर परेशान क्यों होना,
राम सीता ने किया पग पग त्याग, किस्मत मेहरबान कब था ?

जितना है, लुटाते चलिए, फकीरों का का क्या है,
कदम से कदम बढ़ाते चलिए, लकीरों का क्या है,
हर किसी को खुश करने में व्यर्थ समय क्यों गवाना,
जहां दिल करे सर झुकाते चलिए, मंदिरों का क्या है,

जितना हो दीपक जलाते चलिए, अंधेरे का क्या है,
जो भी मिले अपनाते चलिए, ख्वाइशों का क्या है,
ले जाने को सिकंदर भी साथ क्या ले जा सका था,
सत्कर्मों से नाम चमकाते रहिए, सुंदर चेहरे का क्या है,


कोई मेरी एक मुस्कान की खातिर तड़पता रहा,
और वक्त ने कदम कदम पर मुझे धोखा दिया,
जब तलक वक्त को मुझ पर तरस आया था,
मेरे अपनों ने मुस्कुराने का कोई मौका नहीं दिया,

किसी ने आंसुओं के समंदर में डूब कर सब सहा,
लेकिन मैं इतना लाचार कि मुझसे रोका नहीं गया,
जिनके मुस्कान की खातिर विष का प्याला पीता रहा,
उनलोगों को मेरी खुशियां तनिक भी देखा नहीं गया,


सफर में निकलो तो उतार चढ़ाव बहुत होते हैं,
हिचकोले से डर जाने वाले मंजिल को खोते हैं,
अरे मरने के बाद इस शरीर में आग लगना ही है,
अगर दिल में लगा लो आग, मंजिल मिलते ही हैं,

बारिश का हो मौसम, मेढ़क भी टर्राने लगते हैं,
उलझी हो जिंदगी, मूर्ख भी पाठ पढ़ाने लगते हैं, 
अरे बंधु, आग में तपकर ही सोना कुंदन बनता है,
फिर सारी दुनियां उसकी महिमा गाने लगते हैं,


कभी कभी तकलीफ को भी बड़ी तकलीफ होती है,
कुछ मनचलों की शख्सियत ही इतनी अजीब होती है,
डूबने वाले तो यूं किनारे पर भी डूब जाया करते हैं, 
किसी के पास दरिया पार करने की भी तरकीब होती है...

हर पहाड़ को काटकर रास्ता बनाना मुमकिन नहीं है,
पहाड़ काटकर रास्ता बना ही नहीं, ऐसा भी नहीं है,
बस मांझी की तरह दिल पर चोट खाना पड़ता है,
फिर पहाड़ भी पहाड़ सा आदमी को लगता नहीं है,

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

रास्ता अगर आसान हो तो हमसफर बहुत मिलते हैं,
अगर बसंत का हो मौसम तो फुल भी बहुत खिलते हैं,
अमावस्या की तूफानी रात में देवता भी अकेले होते हैं,
जिनके दर्शन का सौभाग्य आसानी से मिलता नहीं है...

©® विपिन वियान हिंदुस्तानी

हर पहाड़ को काटकर रास्ता बनाना मुमकिन नहीं है,
पहाड़ काटकर रास्ता बना ही नहीं, ऐसा भी नहीं है,
बस मांझी की तरह दिल पर चोट खाना पड़ता है,
फिर पहाड़ भी पहाड़ सा आदमी को लगता नहीं है,

*दवा*

जिसे देखो, वही है यहां तबाह,
सबको चाहिए बोतलों वाली दवा,
कभी सुबह की सैर पर निकला करो,
उषा काल की हवा भी है उम्दा दवा,
दोस्तों के साथ महफिल में हंस लिया करो, 
बिना दवा भी जिंदगी में आयेगा खूब मजा,
योग व प्राकृतिक चिकित्सा क्यों भूल गए,
उपवास और एकांत भी है बहुमूल्य दवा,
सकारात्मकता के साथ जिंदगी की बात निराली,
यह है दुनियां के हर मर्ज की बेहतरीन दवा,

✍🏻 *कवि विपिन वियान हिंदुस्तानी*
     *कटिहार, बिहार*

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