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हमनवा

हमनवा बनकर आने वाले अक्सर जो हमदम नहीं बनते हैं।
हमनशीं की तरह दिल में रहकर वो  दिलनशीं याद बहुत आते हैं,
मयकदा में मैकश बनकर मयकशी से भी यह दर्द कम होता नहीं,
बेरहम, बेखबर ऐसे संगदिल यादों की जन्नत में ही खुश रहते हैं,

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