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ज़ख्म

ए दोस्त, गमों की दरिया में डूबकर भी मुस्कुरा कर चलिए,
यहां खिलखिलाते चेहरे पर भी कई चेहरे लगे हैं,
अपने जख्मों को हर जगह यूं बेपर्दा मत कीजिए,
महलम आसानी से कहां मिलता है, सबके घर नमक जरूर रखे हैं...

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परिवर्तन

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