*फलसफा*
✍🏻 *बिपिन कुमार चौधरी*
चांदनी रात में अक्सर,
तारों की चमक फिकी नजर आती है,
हम चाहे नहीं हो बहुत गुणवान,
दुनियां से नजदीकियां, हमारा सम्मान बढ़ाती हैं...
अर्श पर चढ़ कर,
चाहे लाख हम इतरा लें,
फर्श पर अगर पांव हो,
तभी बुलंदियां स्थायित्व पाती है,
ऊंची उड़ान भरकर,
चाहे हम तारा क्यों नहीं बन जाएं,
आज भी यह दुनियां,
चांद सा प्रियतम पाकर ही इठलाती है,
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