संकट में बच्चों का भविष्य...
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आभाव वश शिक्षक वृत्ति,
प्रभाववश मिली स्वीकृति,
शिक्षा का हो कैसे उत्थान,
बिना प्रवृत्ति और संस्कृति,
शिक्षण में दिल लगे नहीं,
वर्ग में आते मानो अतिथि,
परिणाम शून्य सभी योजनाएं,
बिना बदले प्रकृति व प्रवृति,
राष्ट्रनिर्माता के गौरव से गर्वित,
कर्त्तव्य विमुख बनकर पतित,
अपना ही दुखड़ा गाते हैं नित्य,
गंभीर संकट में बच्चों का भविष्य,
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