गरीब...
साहब, बेशक गरीब हूं,
ऐसा वैसा थोड़ी हूं,
सबको पसंद आ जाऊं,
पैसा थोड़ी हूं,
लालच में इंसानियत भुला दूं,
इतना लाचार थोड़ी हूं,
मेरे दोस्त जरूरत में करना कभी याद,
दिल का अमीर हूं...
लाख सितम सहता हूं,
क्योंकि गरीब हूं,
दाने दाने को रहता हूं मोहताज,
ऐसा बदनसीब हूं,
ईमानदारी की रोटी ही रास आता है,
आदमी अजीब हूं,
मेहनत से दो रोटी पाकर संतुष्ट रहता हूं,
ऐसा खुशनसीब हूं...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें