#नया_मोड़
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
वक्त की निर्बाध प्रवाह में,
जिंदगी के पन्ने पलटते गए,
अश्रु की तेज धार में,
सपनों के महल लूटते गए,
हक़ीक़त के पथरीले पथ पर,
कठिन दौड़ से होता रहा सामना,
मजबूरियों का भेंट चढ़ गया,
जिन सुखद अहसास का था कामना,
गैरों से निरर्थक भय था,
अपने ही सपनों के हत्यारे थे,
दिल पर कहर उन्होंने ही ढ़ाया,
जान से ज्यादा जो प्यारे थे,
मानव मन का दृढ़ संकल्प,
ढूंढता उल्लास का नया विकल्प,
टूट कर बिखर फ़िर संभल जाता है,
अक्सर नया इतिहास बनाता है,
जीवन के ज्वार भाटे से,
बवंडर में थोड़ा डगमगाते से,
जिजीविषा के शरण में जाता है,
उन्नति का नया मार्ग पाता है,
लक्ष्य अक्सर जिसने चुना कठिन,
पुरुषार्थ से बनाता रहा मुमकिन,
भावनाओं से जब भी खिलवाड़ हुआ है,
जीवन को एक नया मोड़ मिला है,
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