गृहस्थ माँझी
✍ बिपिन कुमार चौधरी
रिश्तों का डोर,
खींचे कई ओर ...
परेशानी वाला मोड़,
दिल देता है तोड़ ...
खींचे कई ओर ...
परेशानी वाला मोड़,
दिल देता है तोड़ ...
वक्त की नजाकत,
भरोसे की ताकत,
अपनों के साथ दावत,
हर इंसान की है चाहत ...
भरोसे की ताकत,
अपनों के साथ दावत,
हर इंसान की है चाहत ...
जिम्मदारी का एहसास,
ईश्वर पर विश्वास,
चिंता से बेफिक्री,
खुशनुमा बनाता है आज ...
ईश्वर पर विश्वास,
चिंता से बेफिक्री,
खुशनुमा बनाता है आज ...
जीवन की चुनौती,
गैरों से अपनोती,
दिल छूने वाली आवाज,
पूजता है समाज ...
गैरों से अपनोती,
दिल छूने वाली आवाज,
पूजता है समाज ...
उम्मीद का टीला,
तोड़े शांति का क़िला,
रखते ख़ुद पर जो भरोसा,
नहीं करते किसी से शिकवा-गीला ..
तोड़े शांति का क़िला,
रखते ख़ुद पर जो भरोसा,
नहीं करते किसी से शिकवा-गीला ..
मुसीबतों की आँधी,
बनना ग़रीबी में गाँधी,
लोकाचार के इसी कर्मपथ में
नाव खेता है गृहस्थ माँझी..
बनना ग़रीबी में गाँधी,
लोकाचार के इसी कर्मपथ में
नाव खेता है गृहस्थ माँझी..

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