दिल लगाने का जिंदा अभी जज़्बा है ...
✍ बिपिन कुमार चौधरी
वो यादों में रहती है,
वो ख्वाबों में रहती है,
मन की गहराइयों में जिसका डेरा है,
वो दिल के किताबों में रहती है,
वो ख्वाबों में रहती है,
मन की गहराइयों में जिसका डेरा है,
वो दिल के किताबों में रहती है,
बिना कुछ पूछे,
वह सब जानती थी,
अल्फाजों की क्या बात करूं,
मेरी आहट भी पहचानती थी...
वह सब जानती थी,
अल्फाजों की क्या बात करूं,
मेरी आहट भी पहचानती थी...
मेरी जिंदगी से जब हुई रुखसत,
तन्हाइयों का डेरा है,
खुशनुमा ख़्वाब विदा हो चुके हैं,
जिंदगी में मायूसी का बसेरा है ...
तन्हाइयों का डेरा है,
खुशनुमा ख़्वाब विदा हो चुके हैं,
जिंदगी में मायूसी का बसेरा है ...
यादें आजकल इंसाफ़ माँगती है,
वादे जवाब बेहिसाब मांगती है,
वफ़ा करना मेरे लिये आसां नहीं था,
मेरे दिल के धड़कन में बसने वाली भी यह बात जानती है...
वादे जवाब बेहिसाब मांगती है,
वफ़ा करना मेरे लिये आसां नहीं था,
मेरे दिल के धड़कन में बसने वाली भी यह बात जानती है...
रब से मेरी इतनी मिन्नत है,
जिस हाल में जहाँ भी मेरी जन्नत है,
वक्त के दिए जख्मों को भुलाए रखना,
उसकी जिंदगी को खुशियों से सजाए रखना..
जिस हाल में जहाँ भी मेरी जन्नत है,
वक्त के दिए जख्मों को भुलाए रखना,
उसकी जिंदगी को खुशियों से सजाए रखना..
वक्त ने जख्मों को भर दिया है,
हालात ने आरजू का क़त्ल कर दिया है,
जिंदगी तुमसे कोई शिकवा नहीं,
तुमसे दिल लगाने का अभी जज़्बा जिंदा है...
हालात ने आरजू का क़त्ल कर दिया है,
जिंदगी तुमसे कोई शिकवा नहीं,
तुमसे दिल लगाने का अभी जज़्बा जिंदा है...

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