सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...
✍ बिपिन कुमार चौधरी
हाँ, मैं एक शिक्षक हूँ,
बच्चों को पढ़ाना कर्तव्य हमारा,
शिक्षा के अलख से जब नहीं सजेगा बचपन,
भारत जगतगुरू फ़िर कैसे बनेगा ....
शिक्षा जगत में होने वाले खिलवाड़ का,
सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...
नई पीढ़ी को सजाने का करते हम जतन,
निज परेशानी से विचलित रहता है मन,
बड़ी कठिनाई के बीच गुजरता यह जीवन,
मानवता के फलदार वृक्ष को सींचने का प्रयत्न बेकार रहेगा ,
शिक्षा जगत में होने वाले खिलवाड़ का,
सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...
हमसे भी अगर कोई कमी रह जायेगी,
यह समाज भी जि़म्मेदार रहेगा,
शिक्षा से वंचित लोगों का बेहाल रहेगा परिवार,
लोकतंत्र के मठाधीशों की जिंदगी गुलजा़र रहेगा,
शिक्षा जगत में होने वाले खिलवाड़ का,
सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...
पढ़ाई हो गयी इतनी महँगी,
बच्चों को पढ़ाएं या घर लाएं रोटी,
राष्ट्रप्रेम के वंचित यौवन से अपने लोगों का बहेगा लहू,
भेद-भाव वाली शिक्षा से क्या संस्कार रहेगा,
शिक्षा जगत में होने वाले खिलवाड़ का,
सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...
राजनीति ने प्यारी धुन बजायी है,
आरक्षण, भेद-भाव की नई विधियां ले कर आयी है,
राष्ट्र के युवाओं में अवसर का हाहाकार रहेगा,
शिक्षा जगत में होने वाले खिलवाड़ का,
सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...
सत्ता संग जनता भी गुनाहगार रहेगा ...

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