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तेरे आंखो में आँसू देखकर चाँद को भी रोना आया हैं...

तेरे आंखो में आँसू देखकर चाँद को भी रोना आया है...

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

ए मेरी जिंदगी, तुझे रब ने सिर्फ मेरे लिये बनाया है,
तेरी आंखो में  आंसू नहीं आये,  खुशियों का ऐसा महल मैंने दिल में बनाया है,
इस महल को छोड़ कर  तुम नहीं जाओगी ऐसा कसम तूमने भी खाया है,
तेरे आंखो में आँसू देख कर चाँद को भी रोना आया है...

मैं जानता हूँ, इन आंसुओं को तुमने कई बार छिपाया है,
आख़िर मुझसे क्या ख़ता हुई, इन आंखो में आँसू भर आया है,
मेरे दिल का महल पसंद नहीं या मुझसे दिल भर आया है,
तेरे आंखो में आँसू देख कर चाँद को भी रोना आया है ...

जिंदगी की उलझनो से परेशान होकर भी तुमने अक्सर मुस्कुराया है,
अपनी हर मर्ज का दवा तुमने मुझको हीं बताया है,
तेरी सादगी पर कुर्बान इस दिल को तेरी खामोशी ने उलझाया है,
तेरे आंखो में आँसू देखकर आज चाँद को भी रोना आया है...

इन पंक्षियों से तूं जा कर पूछ, तिनकों को जोड़ मैंने यह महल बनाया है,
तेरे चेहरे की मायूसी देख कर  महल की दीवारें भी हिलने लगी है,
तेरे चेहरे की मुस्कुराहटों से जिन दीवारों को मैंने सजाया है, 
तेरे आंखो में आँसू देख कर आज चाँद को भी रोना आया है...

अगर जिद्द है तुम्हारी, मैं भी तुमसे जूद्दा नहीं हूँ,
अल्फाजों को बयां किये बग़ैर जान जाऊं, मैं ख़ुदा नहीं हूँ...
तुम इतनी उलझन में क्यों हो, ये कैसा मुसीबत आया है,
तेरे आंखो में आँसू देखकर चाँद को भी रोना आया है...

लिपटकर मेरे सीने से अब यूं आँसू मत बहाओ,
अपनों की बात मान लो मेरी ख़ातिर अपनी जिंदगी जहन्नुम नहीं बनाओ,
मैं तेरी यादों में जिंदगी गुजार लूंगा, ऐसा वफ़ा मैंने तुमसे पाया है,
तेरे आंखो में आँसू देखकर चाँद को भी रोना आया हैं ...

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