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दिल से निकाल फ़ेंकना इतना जरूरी भी नहीं है ...

दिल से उसे निकाल फेंकना जरूरी भी  नहीं है ...

✍🏻  बिपिन कुमार चौधरी

ग़म तुम्हारा बहुत कम है,
आँखें मेरी भी तो नम है,
हालातों से लड़ के दिखाओ,
अगर तेरे प्यार में भी इतना हीं दम है ...

शान की जिंदगी जीना,
इसमें कोई बुराई तो नहीं है,
एहसान की जिंदगी तुम्हें मुबारक हो,
ऐसी भी कोई तुमसे लड़ाई नहीं है ...

जगह जिसे तुम भरना चाहती हो,
मेरा दिल इतना बेईमान नहीं है,
कभी दिल की गहराइयों में उतर कर देखो,
इसमें उतरना भी इतना आसान नहीं है ...

जिंदगी के इस समंदर में,
हर क़दम पर तूफानों का मेरी क़िस्मत में लेखा है,
किश्ती को किनारे लाकर भी,
मैंने अक्सर इसे डूबते देखा है ..

वक्त पर मुझको बहुत भरोसा है,
जिंदगी ने अक्सर कठिन थाली पड़ोसा है,
अपने भी लेते हैं पल-पल इम्तिहान,
इस बदनसीब ने ऐसे हीं अपनों को देखा है ...

तुम्हें ख़ुद की पड़ी है,
सिर्फ अपने जिद्द की पड़ी है,
जिसने फटेहाली में भी मुझ पर एतबार किया था,
दिल से निकाल फेंकना उसे इतना जरूरी भी नहीं है ...

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