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७७.युवाओं का जगना होगा ... @

युवाओं को जगना होगा ...

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

षडयंत्र का आलम ऐसा है,
आदमी जो बन नहीं सका,
इंसानियत का जिसने माखौल उड़ाया,
लोगों के बीच बना बैठा देवता है...

अश्रुधारा उन्हें दिखती नहीं है,
आलोचना जिन्हें पचती नहीं है,
समाजसेवा को जिन्होंने व्यापार बना डाला,
कोई सामाजिक कार्यक्रम उनके बग़ैर सजती नहीं है ...

आमजन मायूस है,
सत्ताभोगीयों के उल्लास में,
विपक्ष ख़त्म करने की हो रही है साजिश,
पहली बार भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ...

देशभक्ति पर आयी है आफ़त,
सिर चढ़ बोल रहा अंधभक्तों की ख़ुराफ़ात,
भूल गये लोकतंत्र ने दी यह ताकत,
कुछ लोगों के अय्याश में
देशद्रोही बनाया गया हूँ,
अपने लोगों को न्याय दिलाने के प्रयास में ...

बग़ावत की आँधी आएगी,
माँ भारती फ़िर अलख जलाएगी,
अपने हीं कुकर्मों से नष्ट हो जाएंगे,
लोकतंत्र नष्ट करने की मिथ्या विश्वास में,
युवाओं को जगना होगा,
अपनी आवाज बुलंद करने के प्रयास में ...

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