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७८. तांडव बहुत मचाऊंगा @

तांडव बहुत मचाऊंगा ....

(वर्तमान सामजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के विरुद्ध युवाओं का क्रांति गीत)

✍🏻   बिपिन कुमार चौधरी

कुछ लोग कवि कहते हैं,
कुछ मुझको कहते हैं ढोंगी..
उन आँखों का मैं क्या करूं ,
जिनके पीछे का दिलो-दिमाग है मन का रोगी ...

इंकलाब आएगा,
संग्राम अभी बांकी है,
मेरे पंखों से मत जलो,
इम्तिहान मेरा बांकी है..
समस्या का समाधान बाँकी है,
अभी हमारा उड़ान बांकी है ...

मोह-माया में फंसा हूँ,
जुबां इसलिए मेरी बंद है,
उस खेल का मैं भी माहिर खिलाड़ी हूँ,
जिसका नाम शतरंज है,

मेरी कमजोरी का तुमने,
फायदा बहुत उठाया है,
हक जिसपर तुम्हारा नहीं था,
उसे भी तुमने हथियाया है,

खैरात किसी का नहीं था ये आजादी,
अपने पूर्वजों के मेहनत का फल हमने पाया है,
अब भी सुधर जाओ आप,
पहले हीं बहुत सताया है ....

मानवता के लिये मैं तैयार होकर आऊंगा,
सावधान हो जाओ छलियों,
रणभेरी की जब बजेगी आवाज,
तांडव बहुत मचाऊंगा ....

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