जीवन
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
ख्वाइशो के भंवर में फंसा इंसान,
अपने हीं बनाये उलझनों से परेशान,
ख्वाईशौं की गुलामी में संघर्ष करता है,
अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ करता है ...
धन की लालसा, पद की इच्छा,
सत्ता के लिये ईमान का भी हवन करता है,
इसी धुन में अनेकों कुकर्म करता है,
अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ करता है ...
अपने-परायेपन का कुचक्र,
स्वार्थ सिद्धी हेतु सशक्त संपर्क,
जीवन की तलाश में मौत से संपर्क करता है,
अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ करता है,
ख्वाईशो का विस्तारित गगन,
मजबूरियों के हाथों तिरस्कृत उपवन,
किसी की वाह, कोई आंहें भरता है,
अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ करता है...
कर्म की साधना, धर्म का शरण,
हक की लड़ाई, दरिद्रता में भी उल्लसित मन,
जीवन के कठिन पथ को सहज करता है,
मानवता को नित्य समर्थ करता है,
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