हाँ हम सेल्फी के लिये तैयार हैं....
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
(BPNPSS,MUL कटिहार)
हाँ हम सेल्फी के लिये तैयार हैं,
अपने कर्तव्य को पुरा करने को बेक़रार हैं,
घर-परिवार की जिम्मदारी पूरी करने के लिये,
ट्रांसफर-पोस्टिंग का भी हमें इंतिजार है ...
कुछ शिक्षा मित्र गाँव के स्कूल में शहंशाह बनें हैं,
कुछ विद्यालय की दूरी से लाचार हैं,
मेडमजी हम घर से समय से निकलते हैं,
हमारी मजबूरी के पीछे आटो टेम्पों वाले का अत्याचार है...
शिकंजा आप चाहे जितना कसो,
चाहे हमारी मजबूरी का आप मजाक बना लो,
स्कूटी इतना तेज हम कभी नहीं चलाते थे,
थोड़ा लेट पहुँच कर भी बडे़ दिल से बच्चों को पढ़ाते थे ...
अब सेल्फी के लिये रोज समय पर पहुंचती हूँ,
कभी बिना खाए तो कभी खा कर पहुंचती हूँ,
लेट करना हमारी आदत नहीं है,
दुधमुंहे बच्चे के क्रंदन और मातृत्व धर्म के बीच घुट-घुट कर मरती हूँ...
सड़क हादसों का भी मैं बहुत शिकार हूँ,
बूढ़ी सासू माँ की बीमारी से भी लाचार हूँ,
पति बाहर में नौकरी करते हैं,
जीवन की क्रूर चक्की का शिकार हूँ ...
अल्प त्योहारी वेतन, जीवन की दुश्वारियां,
विद्यालय की दूरी, निजता का हनन,
फ़िर भी हम जिम्मदारी निभाने को तैयार हैं,
हाँ मेडम जी, हम सेल्फी के लिये तैयार हैं ....
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