याद रख, अपने गुनाहों की तूं मुकम्मल सजा पायेगा...
👍 बिपिन कुमार चौधरी
सत्ता की मदहोशी में कोई इस कदर झूमा है,
जिनके रहमोकरम से इसे हासिल किया वही आज अनसुना है,
पांच वर्ष बाद फ़िर मेरे हीं दर पर आएगा,
याद रख, अपनी गुनाहों का तूं मुकम्मल सजा पाएगा ...
जिसे तूं आजकल आँधी बता रहा है,
अपनी खुशी से फूला नहीं समा रहा है,
तेरे कर्मों से बहुत जल्द ऐसा आँधी फ़िर आयेगा,
याद रख अपने गुनाहों का तूं मुक्कमल सजा पाएगा ...
हम अक्सर रहगुजर पर भी तकिया डाल कर सो जाते हैं,
अपनी क़िस्मत ऐसी है तेरे जैसों के लिये तख़्त सजाते हैं,
अपने हीं किये वादों को अगर भूल जाएगा,
याद रख अपने गुनाहों का तूं मुक्कमल सजा पायेगा ...
हमारी यह क़िस्मत हमें इसी तरह रोना है,
नई उम्मीद में फ़िर नई फ़सल बोना है,
धरती माँ की कृपा से नई सुबह आयेगा,
याद रख अपने गुनाहों की तूं मुक्कमल सजा पायेगा ...
जाति धर्म में बंटा हूँ, इसलिए मिली यह सजा है,
एक बार नहीं, इन्हीं लोगों ने कई बार ठगा है,
नई पीढ़ी एक दिन नई क्रांति लेकर आयेगा,
याद रख अपने गुनाहों की तूं मुक्कमल सजा पायेगा ...
दोनों हाथ जोड़ कर सुनहरे सपने दिखाने वालों,
हमारे ख़ून-पसीने की कमाई अपने ऐशो-आराम पर उड़ा लो,
सत्ता के सितम का वो पल बित गया, यह भी बित जायेगा,
याद रख अपने गुनाहों की तूं मुक्कमल सजा पायेगा ...
मेरी मजबूरीयों में तूने बहुत आँख दिखाया है,
सत्ता की बंदूक का डर लाठी भी चलवाया है,
हमें अपने रब पर भरोसा, तेरा गुरूर बिल्कुल नहीं टिक पायेगा,
याद रख, अपने गुनाहों की तूं मुक्कमल सजा पायेगा ...
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