याद रखना मैं आम इन्सान हूँ...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
मेरे पिछे साजिश करने वालों,
तुम्हें कैसे लगता है, मैं अनजान हूँ,
तेरी गुनाहों की मिलेगी मुक्कमल सजा,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ ...
इस गफलत में बेशक तुम बहुत ख़ुश रहो,
कुर्सी पाकर लगता है, मैं भगवान हूँ,
यह क़िस्मत तेरी, मैं अभी मेहरबान हूँ,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ ...
अभी ख़ुद की उलझनों से परेशान हूँ,
मजबूरी के हाथों बिक कर बेईमान हूँ,
तेरी हुकूमत का यह असर शैतान हूँ,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ ...
दिनकर और दुष्यंत की मैं जुबान हूँ,
अपनी हद में आकर एक पल सोच तूं जरा,
मैं हर पीड़ का अंतिम समाधान हूँ,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ...
अधूरा रह गया वो अरमान हूँ,
सिसक रही जिंदगी, बेजुबान हूँ,
हर क्रांति के पीछे का आह्वान हूँ,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ...
अपनी क़िस्मत पर यूं नहीं इतराओ,
तेरी नियत से बिल्कुल हैरान हूँ,
जल्द लाने वाला कोई तूफ़ान हूँ,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ ...
इतिहास के पन्नों को कभी उलट कर देखना,
अनंत पापियों का इकलौता व्यवधान हूँ,
कितने सिकंदर को पहुँचाया कब्रिस्तान हूँ,
याद रखना मैं आम इन्सान हूँ ...
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