बहुत बड़ा यह है राज ...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
दाने-दाने को मोहताज़,
सिर पर अन्नदाता का ताज,
आमदनी क्यों हो जाती है सिफर,
बहुत बड़ा यह है राज ...
मुर्गे के बांग से पहले,
पहुंच करता दिन रात काज,
बच्चे भूखे क्यों रह जाते उनके,
बहुत बड़ा यह है राज ...
जिनके पुरुषार्थ के बल पेट भरता समाज,
जिनके परिश्रम पर राष्ट्र को नाज,
आत्महत्या के ख़ून से रंगा क्यों उनका इतिहास,
बहुत बड़ा यह है राज ...
पूस की रात, सवा शेर गेहूँ,
आंसू बहाता बुद्धिजीवी समाज,
आख़िर क्यों इतने दयनीय हालात,
बहुत बड़ा यह है राज ...
मंच पर जिनके दर्द का कर बखान,
चढ़ी जिन्होंने राजनीति की ऊंची उड़ान,
हतप्रभ क्यों नहीं इनकी नियति से आज,
बहुत बड़ा यह है राज ...
ईश्वर की क्रूरता सबसे ज्यादा शिकार,
फ़िर भी करता नित्य परोपकार,
काम आयी नहीं मंदिर की आरती और नमाज
बहुत बड़ा यह है राज ...
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