इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
इंसान से इन्सान,
इतना क्यों है परेशान,
निज स्वार्थ में बना ऐसा हैवान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
क़ीमत लगाओ बिकाऊ ईमान,
थानेदार और क्लर्क पर अंगुली मत उठाओ,
यहाँ तो हर कुर्सी है बईमान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
सफ़ेद लिबास के अंदर का भगवान,
डोनेशन पैरवी के बल लिया कमान,
बच गये तुम्हारी किस्मत,
वर्ना जि़म्मेदार भगवान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान...
सजाया गया बड़ा-बड़ा दुकान,
मिलता कहीं नहीं है ईमान,
मिलावट कर मिलावट से मर रहा इन्सान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
उपदेश देते बनने का राम,
हनीप्रीत की तलाश में बने आशाराम,
साधु-संत भी हैं परेशान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान...
सत्ता की कुर्सी, अवार्ड, सम्मान,
बड़ी दूर इनसे ईमान,
चापलूसी-चमचागिरी से क़िस्मत मेहरबान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
पैसा मजहब, यही चारों धाम,
यही करता सबका कल्याण,
इसकी कृपा से वंचित ईमान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
पॉकेट की गर्मी, शहद जुबान,
फटेहाली में मालिक है भगवान,
न्याय जिसकी दासी, उदास ईमान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
बड़ी खूबसूरत उनके लिये जहान,
दुश्मन भी बन जाते हैं भाईजान,
अगर माँ लक्ष्मी हो जाये मेहरबान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
ईमानदारी क्यों इतना बदनाम,
सहता हर जगह यह अपमान,
ख़तरे में मानवता और इन्सान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
मुश्किल जिंदगी, दुर्लभ ईमान,
बहुत मुश्किल है यह इम्तिहान,
संकट में सृष्टि बिना समाधान,
इंसानियत ख़ुद है आज हैरान ...
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