माफ़ किया जा सके यह ऐसा पाप नहीं है ...
न्याय के मंदिर पर अंगुली उठाऊं,
ऐसी हमारी औकाद नहीं है,
बिल्कुल भी हम मौन रह जाएं,
इतने आसान हालात नहीं हैं ...
सूर्य को उगने से रोक पाये,
इतनी लंबी कोई रात नहीं है,
किसी के दबाव में यह मंदिर भी है,
सब ठीक हो, ऐसी कोई बात नहीं है ...
न्याय के मंदिर में हो अन्याय,
इतने मुश्किल हालात नहीं है,
लोकतंत्र अगर खतरे में आ गया है,
निःसंकोच काले कोट में लाज नहीं है ...
विरोधी स्वर जो दबाया नहीं गया हो,
ऐसी कोई बुलंद आवाज नहीं है,
पाप का घड़ा उबलाने लगा है,
नजरंदाज करने वाला यह पाप नहीं है...
सत्ता सुख में बेफिक्र मन,
न्याय के चौखट पर न्याय का दमन,
ग़लती का इनको एहसास नहीं है,
माफ किया जा सके, यह ऐसा पाप नहीं है...
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