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८३. कर्मशीलता @

💐                   कर्मशीलता               💐
             ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

अक्सर महत्वकांक्षा ने लोगों को ऊंचाई पर पहुँचाया है,
ऐसे लोगों को रब ने छोटा सपना देखना नहीं सिखाया है,
पराजय का उपहास उड़ाने वालों,
ये बताओ तुमने क्या पाया है ? ? ?

सीढ़ियां चढ़ते अक्सर गिरने वालों को दर्द का एहसास नहीं होता है,
मातृत्व सुख की आकांक्षा में प्रसव पीड़ा का आभास नहीं होता है,
जीवन में सुख-दुःख का ज्वार भाटा आता हीं रहता है,
कर्मशील व्यक्ति सृष्टि में किसी का मोहताज नहीं होता है...

भूमि की गहराई का अट्टालिकाओं की ऊंचाई से अजीब रिश्ता है,
उँचे लक्ष्य रखने वाले जीवन की चक्की में अक्सर पीसता है,
सोना भी कुन्दन बनने से पूर्व सुनार की हाथों में घिसता है,
इतिहास गवाह है मानव उत्थान के पौध को कर्मशीलता हीं सींचता है ...

जग में आये हो तो ऊपर जाना है
क्या लेकर आये जो कुछ ले जाना है
साधनहीन का पथ सरल बनाना सरल नहीं है,
लेकिन कर्मशीलता को अपनी उपस्थिति भी जताना है...

स्वर्ग-नरक की उलझन में अक्सर लोग भटकते हैं,
कर्मशीलता को मानवता की मधुर धुन बजाना है,
अपनी नहीं सही, अपनों के जीवन को स्वर्ग बनाना है..
इसीलिये जग आपका दिवाना है, जग आपका दीवाना है....

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