शिक्षक नेता
✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
नेतागिरी के चक्कर में,
कुछ शिक्षकों के काल हो गये,
कुछ कमाल हो गये,
कुछ क्लर्क के दलाल हो गये ...
शिक्षा से नाता तोड़ लिया है,
अफसरों का करीबी होकर,
रुतबा इनका हाकिम हुआ है,
पद की प्रतिष्ठा और गरिमा खोकर...
अल्प वेतन, काम का बोझ...
समय की पाबंदी, भविष्य का निर्माण...
नित्य नये चुनौतियां लेती हैं इम्तिहान,
इसलिए समाज में है इनका सम्मान,
इतने तभी नेता नहीं थे,
फ़िर भी सम्मान से पद सुशोभित था,
सरकार के शोषण, विभाग का भ्रष्टाचार ..
इनको रोकने का जिसने बीड़ा उठाया था,
बच्चों से जा कर विद्यालय में पूछो आप,
विद्यालय में इन्होंने कब पढ़ाया था...
न्यायालय में हक की लड़ाई थी,
इनकी लॉटरी निकल आयी थी,
ख़ूब इन्होंने की थी हवाई यात्रा,
जम कर पसीना बहाया था,
चंदा और हिस्से की लड़ाई में,
एक नया संघ बनाया था,
कल तक जो इनके सिरमौर थे,
आज उनपर इल्ज़ाम लगाया करते हैं
समस्या का समाधान करने से पहले
व्हाट्सऍप पर अपने नेतृत्व का बखान पढ़ाया करते हैं,
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