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८०. विश्वास @

विश्वास

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

जिंदगी छोटी है, 
चाहतें बड़ी बड़ी ...
इच्छाएं भले पूरी ना हो ...
हसरतें रह जाएं अधूरी 
आरजू रब से इतना है, 

आहत ना हो मुझसे,  इंसान कोई ...


दिल का क्या है 
ये टूटता हीं रहता है 
गलती इंसान करता है 
सजा ये दिल पाता है ...
मिन्नत रब से बस इतनी है, 
खता ना हो मुझसे ऐसा कोई,  
निष्कपट दिल को अगर चोट लगे ....
तो खत्म हो जाये हस्ती हमारी ...


जानबूझ कर कोई गलती नहीं किया, 
ऐसा नहीं की मुझसे ना हुई हो गलती, 
गलत को बर्दाश्त ना कर सकूँ, 
मेरे ईश्वर मुझे दे तूं इतनी शक्ति ...

जिंदगी में गमों का पहाड़ हो, 
हर पल नई चुनौती से टकरार हो,
मुसीबतों से मैं भले टूट जाऊं, 
आत्मविश्वास भले छिन्न भिन्न हो जाये, 
इतनी कृपा मुझ पर बनाए रखना, 
किसी भले मानस का मुझसे विश्वास टूटे नहीं,

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