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७९. राष्ट्रहित @

राष्ट्रहित

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

मुझे गर्व है, मैं हिन्दुस्तानी हूँ..., 
किसी भी धर्म से मेरा बैर नहीं, 
अपनी मातृभूमि से मुझे बहुत प्रेम है, 
इनसे गद्दारी करने वालों की ख़ैर नहीं, 

नेतागिरी की रोटी तुम्हें मुबारक हो,
लेकिन हमारे भाईचारे में जहर मत घोलो, 
हम आधी रोटी खा कर भी खुशी से जी लेंगे,
राष्ट्रहित की सुरक्षा में ज़हर भी पी लेंगे,  

अन्नदाता अन्न को मोहताज है, 
शहीदों का लहू मांगती इंसाफ है, 
अब भी अगर किसी का खून नहीं खोलता है, 
इंसान नहीं वो तो जल्लाद है, 

तिरंगा फहराने का कुछ लोगों को बहुत शौक है, 
हमारे लिये तो यह स्वाभिमान है,
धिक्कार है उन निर्लज्जों को...
चंद कागज के टुकड़ों के लिये, 
जिन्होंने बेच लिया अपना ईमान है ...

नमाज़ नहीं पढ़ता तो क्या हुआ, 
अल्लाह के तो हम सभी बंदे हैं, 
आखिर भारत माता की जय क्यों नहीं बोल सकते,
कुर्सी की लड़ाई में कुछ लोग क्यों इतने अंधे हैं....

राष्ट्रहित सर्वोपरि यह हर धर्म बतलाता है, 
जब भी हम आपस में लड़ते हैं, 
कोई फिरंगी सता कर हमें, 
राष्ट्रहित का महत्त्व सिखलाता है ....


✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी
जिला मीडिया प्रभारी, BPNPSS MUL (कटिहार)

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